जमीन के मुद्दे पे आंदोलनकारी हुए जमींदोज;प्रशासन ने आंदोलनकारियों को कुचलने लगाई गंभीर धारा,दर्ज किया प्रकरण, युवा विधायक देवेंद्र 4 को रखेंगे उपवास कराएंगे विरोध दर्ज

दुर्ग।डबल इंजन की सरकार में छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिला सहित पूरे राज्य में जमीन की बड़ी हुई गाइडलाइन में हुई बढ़ोतरी को लेकर चारो ओर हाहाकार मचा हुआ है चेंबर आफ कॉमर्स हो कांग्रेस हो या फिर बिल्डर वर्ग हो जैसे तमाम लोग अब सिर्फ विरोध ओर आंदोलन की राह में चल रहे है।

पिछले कुछ दिनों से युवा समाज सेवी एवं बिल्डर मनोज राजपूत द्वारा दुर्ग में किए जा रहे शांति प्रिय आंदोलन में आखिर कार किस उपद्रवी ने ऐसी खलल डाल दी की जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को लाठी चार्ज करना पड़ गया ।इससे यह साफ स्पष्ट होता है कि सुशासन की सरकार ने सायं सरकार के नौकरशाह कही न कही सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे है।जिसका खामियाजा आने वाले चुनाव में देखने को भी मिलेगा ।

यही भाजपा की सरकार है जो कहती है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ यही भाजपा की सरकार है जो कहती है 18 लाख मकान आशियाना बना के गरीबों को हम देंगे ओर दे रहे ।लेकिन अब ये दोनों ही सपने इस डबल इंजन की सरकार में आम जनता की पहुंच से दूर हो गई है सोने का भाव डेढ़ लाख से ऊपर ओर घर बनाने के सपना आसमान छू रहा है।एक तरफ परिवार अब सोना खरीदने से वंचित है वहीं दूसरी तरफ एक आम व्यक्ति एवं सामान्य वर्ग परिवार का सब से बड़ा सपना एक घर हो अपना अब सायं सरकार ने उससे भी वंचित कर दिया।जनता प्रश्न करती है क्या यही सब का साथ सब का विकास है।

खैर एक तरफ पुलिस एवं प्रशासन ने आंदोलनकारीयों पर दिनांक 01/12/2025 को 151 के तहत कार्यवाही की वही उनके जमानत के पश्चात दूसरे दिन पुनः पुलिस प्रशासन द्वारा आंदोलन कर रहे लोगों पर प्रतिबंधक कार्यवाही दिनांक 02/12/2025 को गिरफ्तारी की सूचना नोटिश के माध्यम से राकेश यादव ,जितेंद्र बत्रा, दिनेश पांडे,अनिल वासनिक,एवं विक्की चंद्राकर को अपराध क्रमांक 609/2025 धारा 221,126(2) 191 (2) 121(1) 132 61 (2) 125 का BNS के अपराध में गिरफ्तार किया गया ओर न्यायालय में पेश किया ये बाते हमारे प्रतिनिधि को दूरभाष पर थाने दार ने इसकी पुष्टि की हैं। वहींथाना प्रभारी का ये पत्र मधुबन चंद्राकर पिता रजक चंद्राकर उम्र 40 वर्ष शीतला नगर दुर्ग को गिरफ्तारी की सूचना दी गई।

इस आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्यवाही की संभावना प्रबल है सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई है कि आंदोलनकारियों को कुचलने के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं का खुल के इस्तेमाल किया जा रहा है।कही यह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के गाड़ी रोकने वाले मामले से प्रेरित तो नहीं?

दुर्ग में हुए आंदोलन के दौरान वीडियो में आंदोलन का संचालन कर रहे समाज सेवी एवं बिल्डर मनोज राजपूत कहते हुए नजर आ रहे है कि अपने लोगों को ओर समर्थकों को समझाइश दे रहे है कि आंदोलन शांति प्रिय ढंग से चलने दो लेकिन किसी अज्ञात उपद्रवी ने पानी पाउच,झंडा एवं बोतल फेंके जाने का प्रशासन के पास वीडियो फुटेज यदि है तो उसे बताए या सार्वजनिक करे।ऐसा मनोज ने वक्तत्व एक बड़े समाचार पत्र में दिया है।

इसी मामले में दिनांक 04/12/2025 को भिलाई नगर के युवा विधायक देवेंद्र यादव के द्वारा हिंदी भवन चौक महात्मा गांधी प्रतिमा के पास दुर्ग में एक दिवसीय भूख हड़ताल किया जा रहा है।

इससे यह साफ स्पष्ट होता है कि कही न कही जिला एवं पुलिस प्रशासन की इंटेलीजेंस फेलवर नजर आई जो ACCU की टीम के जवान जो कि रात दिन सादी वर्दी में घूम कर चोर गुंडे बदमाशों की नब्ज टटोल लेती है क्या वह आंदोलन में शामिल उपद्रवी को आखिर क्यों नहीं पहचान पाई।जिला एवं पुलिस प्रशासन के अफसर पर पानी पाउच ,बोतल फेकना जैसी बाते जो सामने आ रही है उससे कही न कही सायं सरकार की छवि खराब हो रही है यह सारा वाक्या गत दिवस भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह ने खुद देखा है। जमीनों की बड़ी हुई गाइडलाइन का निर्णय स्वयं सरकार में बैठे हुए मंत्रियों द्वारा किया गया है।जो कही न कही सरकार के गले की फास हड्डी बना जा रहा है।जवाबदेह सरकार में बैठे लोगों को ये कहकर शांत करने का प्रयास कर रहे है कि बड़ी हुई जमीन रेट की गाइडलाइन में कोई विरोधाभाष है तो आप सरकार से अपना आवेदन निवेदन दे सरकार उस पर पुनः विचार करेगी।

अब देखना ये है कि रियल स्टेट का धंधा जो पहले भी कछवा चाल में था और बड़ी हुई जमीन की गाइडलाइन के रेट से आम जनता एवं बिल्डर की कमर टूट गई है। लेकिन दुर्ग जिले में एक से एक नामचीन बिल्डर है लेकिन किसी ने भी आंदोलन की राह नहीं चुनी भले धंधा मंदा ही क्यों ना रहे ।मनोज राजपूत पेशे से एक बिल्डर भी है यदि उन्हानें आंदोलन की राह को अपनाया उसका फायदा सारे बिल्डर सहित आम जनता को भी उसका लाभ मिल सकता था।लेकिन अपनी बातों को रखना लोकतंत्र में आवाज उठाना क्या गुनाह है क्या?गलती करे कोई सजा पाए कोई।

अब देखना ये है कि जिला एवं पुलिस प्रशासन में सरकार की नजर में अपनी पुलिसिया कार्यवाही कर सायं सरकार में अपना रुतबा दिखाने ओर अपनी नाकामी छुपाने आनन फानन में की गई कार्यवाही से समाज वह बुद्धिजीवी वर्ग में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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