
भिलाई नगर।इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे बसल्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन व हसन सहित 72 साथियों की शहादत की याद में व धर्म और सच्चाई की लड़ाई लडते हुये मोहर्रम की 10 तारीख को करबला में शहीद होने के उपलक्ष्य में जगह जगह लंगर का एहतराम किया गया।

इसी उपलक्ष्य में जामा मस्जिद सेक्टर 6 भिलाई के सामने यौमे आशूरा नमाज के बाद छत्तीसगढ़ मुस्लिम फ्रंट व अलफजर कमेटी के तरफ से लंगर का इंतजाम किया गया ।जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने लंगर का लुफ्त उठाया।

मुस्लिम फ्रंट के सदर बाबा खान ने बताया कि फ्रंट शाही लंगर का इंतजाम कई वर्षो से कराया जा रहा है,नमाज के बाद बैठा के लंगर खिलाया जाता है फिर शाम में शाही लंगर का इंतजाम कमेटी के सभी मेंबरों के सहयोग से कराया जाता है।जिसमें बहुत से चीजों को तस्किम किया जाता है ।बड़ी तादाद में जायरीन जुलूस देखने सेक्टर 6 जामा मस्जिद के समाने इक्ट्ठा होते है।।
मोहर्रम में क्या किया जाता है
मोहर्रम के जुलूसों में, अकीदतमंदों द्वारा लंगर और सबील (शरबत) का इंतजाम किया जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जो जुलूस में शामिल होते हैं या जो रास्ते में होते हैं। यह एक पारंपरिक प्रथा है जो इमाम हुसैन की याद में की जाती है, जिन्हें कर्बला की लड़ाई में शहीद कर दिया गया था,आमतौर पर विभिन्न स्थानों पर किया जाता है, जैसे कि इमामबाड़े, मस्जिदें, और जुलूस के रास्ते में। यह लंगर अकीदतमंदों द्वारा स्वेच्छा से दान किए गए धन और सामग्री से बनाया जाता है।
भिलाई के तमाम जगहों से निकले ताज़िए अखाड़े
भिलाई के तमाम जगहों से ताज़िए और अखाड़े जुलूस की सकल में निकलकर पावर हाउस होते हुए मुर्गा चौक से सेंट्रल एवेन्यू होते हुए ,सेक्टर 5 चौक पहुंचा वह पर अखाड़े का प्रदर्शन हुआ ।फिर तमाम ताजिया और अखाड़े करबला के लिए रवाना हो गए।
